दुर्गेश स्मृति राजस्थानी लघुकथा कार्यक्रम

दिनांक :- २५ मार्च, २००८,
स्थान :- नगरश्री सभागार, चूरू
उद्देश्य :- राजस्थानी के सशक्त लघुकथाकार श्री दुर्गेश का १८ नवम्बर, २००७ को चूरू में निधन। उनकी स्मृति में उनके जन्मदिन पर राजस्थानी लघुकथा पर केंद्रित आयोजन करना। दुर्गेश का स्मरण। राजस्थानी लघुकथा को नया आयाम देना।
प्रक्रिया :- संस्थान द्वारा विज्ञप्ति निकालकर निर्धारित तिथि तक लघुकथाकारों से पाँच अप्रकाशित लघुकथाएं मांगी गयी। तय समय तक विभिन्न अंचलों से आई १३५ लघुकथाओं का राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार श्री श्याम महर्षि (डूंगरगढ़), श्रीमती पुष्पलता कश्यप (जोधपुर) व श्री भानसिंह शेखावत (जयपुर) ने अंक आधार पर मूल्यांकन किया। इस मूल्यांकन में दो लघुकथाकारों की रचनाओं को बराबर अंक मिले। अतएव निर्णय का दूसरा दौर निर्धारित किया गया। दूसरे दौर में राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अर्जुनदेव चारण (जोधपुर), यादवेन्द्र शर्मा चंद्र (बीकानेर) व डॉ चेतन स्वामी (फतेहपुर शेखावाटी) ने दोनों लघुकथाकारों की रचनाओं का अंक आधार पर निर्णय किया और योग में सर्वोच्य अंक लघुकथा "छोरी रो जलम" (रामधन अनुज, श्रीगंगानगर) को मिले।
फलत : उन्हें "दुर्गेश स्मृति राजस्थानी लघुकथा प्रतियोगिता पुरस्कार-२००८" घोषित किया गया।
रूपरेखा :-
मुख्य अतिथि - वेदव्यास, अध्यक्ष, राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ , जयपुर
अध्यक्ष - माधव शर्मा, स्वतंत्र पत्रकार, चूरू
विशिष्ट अतिथि - मेजर रतन जांगिड, साहित्यकार, जयपुर
श्याम महर्षि, साहित्यकार, डूंगरगढ़



खास सम्मान :- डॉ उदयवीर शर्मा (बिसाऊ), भंवरलाल भ्रमर (बीकानेर) का राजस्थानी लघुकथा में उल्लेखनीय योगदान हेतु "राजस्थानी लघुकथा पुरोधा सम्मान"।



विमोचन : मिणियाँ-मोती
(प्रतियोगिता में भागीदार २७ लघुकथाकार व अन्य नामी लघुकथाकारों की चुनिन्दा लघुकथाओं का संग्रह) : संपादक-डॉ रामकुमार घोटड।

मुझ से बड़ा न कोय (हिन्दी व्यंग्य संग्रह) : दुर्गेश।

स्मारिका प्रयास-अंक २ (दुर्गेश केंद्रित)।





















स्वागत :
दुलाराम सहारण
आभार :
भंवर सिंह सामौर
संयोजक :-
बैजनाथ पंवार
सञ्चालन :-
कमल शर्मा ।

(दुर्गेश के बारे में ज्यादा जानने के लिए www.eakataprakashan.blogspot.comमें जाकर 'दुर्गेश' पर क्लिक करें।)