डॉ. घासीराम वर्मा साहित्‍य पुरस्‍कार-2009

राजस्‍थान के हिन्‍दी लेखन को समर्पित संस्‍थान का वार्षिक आयोजन 'डॉ. घासीराम वर्मा साहित्‍य पुरस्‍कार वितरण समारोह' दिनांक 28 सितम्‍बर, 2009 को चूरू जिला मुख्‍यालय पर स्थित सूचना केंद्र में आयोजित किया गया। इस पुरस्‍कार का यह द्वितीय आयोजन था। समारोह में जोधपुर मूल की हिंदी की ख्‍यातनाम युवा लेखिका मनीषा कुलश्रेष्‍ठ को उनकी भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित कहानी पुस्‍तक 'कठपुतलियां' हेतु पुरस्‍कृत किया गया।
कार्यक्रम रूपरेखा :-
मुख्‍य अति‍थि - श्रीमती सुलोचना रांगेय राघव, साहित्‍यकार, जयपुर
अध्‍यक्ष - डॉ. घासीराम वर्मा, शिक्षाविद, झुंझुनू
विशिष्‍ट अतिथि - श्रीमती मधु कांकरिया, साहित्‍यकार, कोलकाता
मुख्‍य वक्‍ता - श्री प्रेमचंद गांधी, साहित्‍यकार, जयपुर



झलकियां :-

समारोह का दीप प्रज्‍ज्‍वलन कर उदघाटन करते हुए सुलोचना रांगेय राघव

मनीषा कुलश्रेष्‍ठ को 'डॉ. घासीराम वर्मा साहित्‍य पुरस्‍कार-2009' प्रदान करते हुए अतिथि

मंचासीन सम्‍माननीय अतिथि एवं पुरस्‍कृत साहित्‍यकार

समारोह केंद्रित स्‍मारिका 'प्रयास-4' का विमोचन

समारोह के गवाह साहित्‍य प्रेमी

समाचार पत्रों में समारोह :-












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डॉ. घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार-२००९ घोषित


प्रयास संस्थान ने इस वर्ष अनुशंसित पुस्तकों का मूल्यांकन करके वर्ष २००९ का पुरस्कार जोधपुर में जन्मीं मनीषा कुलश्रेष्ठ की भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित कहानी संग्रह "कठपुतलियाँ" को देने का निर्णय किया है।
संस्थान सभी अनुशंसा कर्त्ताओं का आभारी है। (२६ जुलाई, २००९ /चूरू)



मनीषा कुलश्रेष्ठ
परिचय
जन्म : 26 अगस्त 1967, जोधपुर
शिक्षा : बी एस सी, विशारद ( कत्‍थक) एम. ए. ( हिन्दी साहित्य) एम. फिल.
प्रकाशित कृतियां : बौनी होती परछांई ( कहानी संग्रह) मेधा प्रकाशन
कठपुतलियां ( कहानी संग्रह) ज्ञानपीठ प्रकाशन
कुछ भी तो रूमानी नहीं ( कहानी संग्रह) अंतिका प्रकाशन
उपन्यास 'शिगाफ' (राजकमल प्रकाशन) से शीघ्र प्रकाश्‍य

अन्‍य : बहुचर्चित कहानी कठपुतलियां का साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा तेलुगू, अंग्रेज़ी, पंजाबी, उर्दू, डोगरी, राजस्थानी, कश्मीरी भाषाओं में अनुवाद.
कई विदेशी रचनाओं का हिन्दी अनुवाद
आजकल ज्ञानपीठ की पत्रिका 'नया ज्ञानोदय' के लिए स्थायी कॉलम ' इंटरनेट और साहित्य' लिख रही हैं।
सम्मान : 1989 में राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा 'चन्द्रदेव शर्मा पुरस्कार' से सम्मानित।

2001 में कथाक्रम द्वारा आयोजित भारतीय युवा कहानीकार प्रतियोगिता में विशेष पुरस्कार से सम्मानित।
संप्रति : वेब पर पहली साहित्यक वेबपत्रिका हिन्दीनेस्ट.कॉम का पिछले आठ वर्षों से संपादन तथा स्वतन्त्र लेखन
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विज्ञप्ति :-






प्रयास संस्थान
चूरू-३३१००१ राजस्थान

डॉ. घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार

पुरस्कार नियम
१. राजस्थान के हिन्दी लेखन को प्रोत्साहन-सम्मान देने के लिए वर्ष-२००८ से यह वार्षिक पुरस्कार प्रारम्भ किया जा रहा है। राजस्थान से तात्पर्य जन्म राजस्थान में होना या फिर विगत दस वर्षों से राजस्थान में निवासी होना होगा।
२. इस पुरस्कार का नाम 'डॉ. घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार` रहेगा।
३. पुरस्कार किसे दिया जाये; इसका निर्धारण विगत वर्ष/वर्षों में प्रकाशित कृतियों के मूल्यांकन के बाद संस्थान कार्यकारिणी द्वारा किया जायेगा। किसी एक रचनाकार की कोई एक कृति का चयन पुरस्कार के लिए किया जाएगा।
४. चयनित लेखक को ५१०० रुपये नगद, शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न आदि पुरस्कार/सम्मान स्वरूप दिये जायेंगे। यात्रा-व्यय, भोजन व आवास की व्यवस्था भी संस्थान करेगा। सभी खर्चों का प्रबंधन संस्थान अपने संसाधनों से करेगा।
५. पुरस्कार वितरण समारोह राजस्थान के चूरू जिला मुख्यालय पर प्रतिवर्ष अगस्त माह में आयोजित किया जायेगा। बशर्ते कोई अपरिहार्य कारण न हो।
६. संस्थान उचित समझे तो हिन्दी की राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रतिवर्ष विज्ञापन निकालकर पाठकों/साहित्यकारों से पुरस्कार हेतु कृति-कृतिकार के नाम की अनुशंसा मांग सकेगा।
७. विज्ञप्ति के माध्यम से पाठकों/साहित्यकारों से सिर्फ कृति-कृतिकार के नाम की अनुशंसा मांगी जायेगी। किसी कृति की प्रति नहीं मांगी जायेगी। अनुशंसित किसी कृति की अनुपलब्धता की स्थिति में जरूरत समझे तो वह कृति प्रकाशक से संस्थान स्वयं अपने खर्चे द्वारा मंगवायेगा।
८. ऐसी सूरत में आये नामों पर कार्यकारिणी विचार करेगी और योग्य रचना-रचनाकार का चयन करेगी। जरूरी हुआ तो संस्थान साहित्यकारों का तीन सदस्यीय निर्णायक मण्डल भी बना सकेगा।
९. संस्थान पुरस्कार वितरण समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हिन्दी के किसी एक लेखक-विद्वान व राज्य से किसी एक हिन्दी रचनाकार को आमंत्रित करेगा। ऐसे आमंत्रित रचनकारों के आवागमन व्यय तथा रहने-खाने का प्रबंध संस्थान अपने संसाधनों से करेगा।
१०. संस्थान जरूरी समझे तो किसी समानधर्मी दूसरे संस्थान को सहभागी बना सकेगा।
११. पुरस्कार हेतु नाम के चयन के विषय में संस्थान की अपनी स्वतंत्रता रहेगी। संस्थान कार्यकारिणी द्वारा नियमों में संशोधन-परिवर्द्धन किया जा सकेगा तथा कार्यकारिणी का हर निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा।